मिश्रा ने दशरथ के चेहरे पर उभरी पीड़ा पर बटोरी तालियां

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नेशन अलर्ट/रायपुर.

छत्तीस छटा मंच के बैनर तले सरोना में आयोजित कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ रंगकर्मी विजय मिश्रा अमित ने रामायण के महापात्र दशरथ के दंश को अपने एकल अभिनय में बखूबी उभारा। चक्रवर्ती सम्राट होने के बावजूद अपने प्रिय बेटे श्री राम को राज सिंहासन से परे वनवास जाने का निर्णय देते हुए दशरथ के चेहरे पर उभरी पीड़ा को उन्होंने कमाल के साथ प्रस्तुत किया। दर्शकों ने इस दृश्य को भरपूर जिया। विजय मिश्रा के अभिनय की दर्शकों ने खुलकर सराहना की।

इस इस अवसर पर उपस्थित प्रोफेसर अपराजिता चक्रवर्ती ने कहा कि माता पिता के लिए बच्चे सदैव प्रिय होते हैं। बच्चों की पीड़ा को माता पिता ही सच्चे दिल से महसूस कर सकते हैं। इसलिए यदाकदा अप्रिय निर्णय लेने की चुक वे भी कर बैठते हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रम में डॉ अनिमेष मेहरा, समाज सेवी नवनीता अनंत दुबे, लोक गायिका भगवती साहू, तेजस्विनी राघव सहित बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित थे।

महारानी कैकेई की मांग भरत को राजगद्दी और श्रीराम को 14वर्ष का वनवास सुनकर दशरथ बने विजय मिश्रा ने जो करुण विलाप किया वह दर्शकों को झकझोरने में पूरी तरह सफल रहा। अपने अभिनय के बूते अकेले मिश्रा ने जन समुदाय को भावविह्वल कर खूब तालियां बटोरी। कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन प्रोफेसर अभिनव शर्मा ने किया।

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