बिलासपुर से रायपुर तक लट्ठमार पुलिसिंग !

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रायपुर.

बिलासपुर . . . छत्तीसगढ़ की न्यायधानी . . . रायपुर . . . प्रदेश की राजधानी . . . इन दोनों ही स्थानों में वर्ष 2018 से 2020 के दौरान भले ही बहुत कुछ बदल गया हो . . . लेकिन नहीं बदला है तो पुलिस का चेहरा . . . लट्ठमार पुलिसिंग तब भी थी . . . अब भी है . . . इसमें एक तथ्य सामान्य है . . . वह है शेख आरिफ . . . आईपीएस आरिफ.

आईपीएस शेख आरिफ वर्तमान में पुलिस विभाग के उप महानिरीक्षक यानिकि डीआईजी हैं. रायपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पद पर पदस्थ रहते हुए ही उन्हें ईओडब्ल्यू-एसीबी का अतिरिक्त प्रभार भी मिला है.

इससे ऐसा तो लगता है कि सरकार शेख आरिफ को एक जिम्मेदार आईपीएस अफसर मानती है.जिम्मेदार हैं तो जिम्मेदारी दिखनी भी चाहिए लेकिन शेख आरिफ के मामले में स्थिति उलट है.

वर्ष 2018 में जब प्रदेश में भाजपा की सरकार हुआ करती थी तब शेख आरिफ बिलासपुर के पुलिस अधीक्षक हुआ करते थे.

वर्ष 2020 जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है तब शेख आरिफ ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पद पर राजधानी रायपुर में पदस्थ हैं.

डीआईजी शेख आरिफ की जिम्मेदारी उनके काम में . . . उनकी कप्तानी में कहीं नज़र नहीं आती है. यदि ऐसा न होता तो पहले बिलासपुर और फिर बाद में रायपुर में लट्ठमार पुलिसिंग नहीं होती.

प्रकरण क्रमांक एक :

18 सितंबर 2018 . . . शाम सवा चार बजे . . . तिलक नगर स्थित कांग्रेस भवन जहां पर पांचों थाना प्रभारियों के साथ तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नीरज चंद्राकर घुसते हैं.

उनके घुसते ही अचानक पुलिस आक्रामक होती है और कांग्रेसियों पर टूट पड़ती है. जानवरों की तरह कांग्रेसियों को दौडा़ दौडा़ कर लाठियों से पीटा जाता है.

डर के मारे कुछ कांग्रेसियों की कूदफांद के चलते उनके हाथ पैर टूट गए थे. अटल श्रीवास्तव का सिर फूट गया था. लाठी भांजने अथवा भंजवाने वालों पर कार्रवाई के नाम पर अब तक ठोस कुछ नहीं हुआ है.

प्रकरण क्रमांक दो :

8 जून 2020 . . .राजधानी रायपुर के उरला थाना क्षेत्र का मामला . . . यहां पर सड़क में सादे कपडो़ं में नज़र आ रहे लट्ठधारी थाना प्रभारी एन उपाध्याय दिखाई देते हैं.

सड़क से गुजरने वाली एक महिला को वह न केवल धकियाते हैं बल्कि उसके पुत्र को बेदम पीटते भी हैं. वीडियो वायरल होने लगता है.

वीडियो को लेकर जब उनसे पूछा जाता है तो वह धौंस जमाते हुए कहते हैं कि सब ऊपर के निर्देश पर हो रहा है. सब को ठोक देने की बात कही जाती है.

इन अलग अलग दो घटनाओं में इक सामान्य सी बात इतनी है कि इन घटनाओं के समय दोनों ही जिलों मे एक ही एसपी था . . . और वह है आईपीएस शेख आरिफ.

ऐसा कप्तान जिसका लगता है कि अपनी टीम पर रत्ती भर भी नियंत्रण नहीं है . . . नहीं तो ऐसा होता कैसे ? ( क्रमश: )

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