क्या ईमानदारी की सजा भुगत रहे हैं जीपी ?

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रायपुर.

क्या वरिष्ठ आईपीएस जीपी सिंह सिर्फ़ ईमानदार होने की सजा भुगत रहे हैं ? यह सवाल इन दिनों छत्तीसगढ़ के राजनीतिक – प्रशासनिक गलियारों में जवाब मांगने की कोशिश में खडा़ नज़र आता है.

उल्लेखनीय है कि जीपी सिंह जोकि एडीजी के पद पर पदस्थ हैं कुछ दिनों पूर्व तक राज्य के ईओडब्ल्यू – एसीबी के प्रमुख हुआ करते थे.

न जाने क्यूं एक झटके में ही राज्य शासन ने ईमानदार , जांबाज , कर्त्तव्यनिष्ठ अधिकारी माने जाने वाले जीपी को पद से हटा दिया. आखिर ऐसा हुआ क्यूं ?

सवाल दर सवाल हैं लेकिन जवाब किसी का भी नहीं ! आम जनता इतना तो जानना ही चाहती है कि ऐसा क्यूं और कैसे हुआ ?

जीपी जिन्होंने रिश्तों को हमेशा अहमियत दी. फिर वह चाहे राजनीतिक हों , प्रशासनिक या फिर व्यक्तिगत क्यूं न हों . . . पूरी ईमानदारी से उन्हें निभाया भी है.

यही ईमानदारी उन्होंने मुख्यमंत्री सचिवालय से भी रिश्ते निभाने में रखी थी . . . लेकिन लगता है कि उसे तो कुछ और ही चाहिए था.

तभी तो जीपी सिंह जैसे बहादुर पुलिस अधिकारी को भी दूध से मक्खी की तरह निकाल फेंका गया. इसके निहितार्थ समझ में आए ही नहीं.

निराश जीपी ने कहा : आल इज वेल !

इधर , लगता है इस तरह की कार्यवाई से जीपी सिंह जैसा समर्पित पुलिस अधिकारी भी निराश है. तभी तो वह नेशन अलर्ट द्वारा प्रतिक्रिया लिए जाने की कोशिश में धीमे स्वर में इतना ही कहता है कि ” All is well.”

बहरहाल, ट्रांसफर – पोस्टिंग करना किसी भी सरकार का विशेषाधिकार हो सकता है लेकिन इस तरह से हटाए जाने पर ऐसे सवाल तो उठेंगे ही कि –

ऐसा क्यूं और कैसे हुआ ?

( क्रमश : )

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