डीआईजी बनने वाले कांबले फिर पहुंचे गरियाबंद

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नेशन अलर्ट/रायपुर.

उप पुलिस महानिरीक्षक (डीआईजी) पद पर पदोन्‍नत होने वाले आईपीएस अमित तुकाराम कांबले को एक बार फिर से गरियाबंद जिले की कमान दे दी गई है। गरियाबंद के अलावा बेमेतरा और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) के भी पुलिस अधीक्षक बदल दिए गए लेकिन आईपीएस जितेंद्र शुक्‍ला जैसे अधिकारी को एक बार फिर से जिले के लायक नहीं समझा गया।

गरियाबंद दरअसल, पहले पुलिस जिला के रूप में अस्तित्‍व में आया था। 6 अगस्‍त 2010 को बढ़ती नक्‍सली घटनाओं के मद्देनजर तत्‍कालीन रमन सरकार ने इसे पुलिस जिला घोषित किया था। रमन सरकार के ही कार्यकाल में 1 जनवरी 2012 से यह राजस्‍व जिला के रूप में कार्य करने लगा। पुलिस जिला के समय महज पांच पुलिस थाना मैनपुर, देवभोग, छुरा, गरियाबंद, फिंगेश्‍वर और पुलिस चौकी बिंद्रा नवागढ़ का अस्तित्‍व था। राजस्‍व जिला बनते ही पीपरछेड़ी, पायलीखंड, शोभा, इंदागांव व अमलीपदर नए थाने के रूप में अस्तित्‍व में आए।

कांबले का दूसरा कार्यकाल

वर्ष 2009 बैच के आईपीएस अमित तुकाराम कांबले गरियाबंद जिले के पुलिस अधीक्षक के रूप में दूसरी पारी खेलने जा रहे हैं। पहले भी वह रमन सरकार के समय एक वर्ष 3 माह 26 दिन पुलिस अधीक्षक के रूप में गरियाबंद में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। तब आईपीएस कांबले 8 जून 2015 से 29 सितंबर 2016 तक गरियाबंद के पुलिस अधीक्षक रहे थे।

रमन सरकार के बाद कांबले पर एक बार फिर गरियाबंद जिले को संभालने को लेकर भूपेश सरकार ने भी भरोसा जताया है। यह दिगर बात है कि कांबले कुछ ही समय के बाद डीआईजी के पद पर पदोन्‍नत हो जाएंगे। इसके पहले वह माना बटालियन में पदस्‍थ थे। कांबले स्‍पेशल प्रोटेक्‍शन ग्रुप (एसपीजी) में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति बिता कर आए थे।

वहां से लौटने पर उन्‍हें सीएम सेक्‍यूरिटी का प्रभार मिला। इसके बाद वह सरगुजा के एसपी बनाए गए। कुछ समय के बाद ही वहां से भी हटाकर उन्‍हें माना बटालियन भेज दिया गया था। अब एक बार फिर से गरियाबंद जैसे अपने पुराने जिले में बतौर पुलिस अधीक्षक कांबले की वापसी होने जा रही है लेकिन यहां वह कब तक रह पाएंगे यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उन्‍हें सरकार कब डीआईजी के पद पर पदोन्‍नत करती है।

उदय व एलेसेला की तरह शुक्‍ला की किस्‍मत नहीं

बहरहाल, वर्ष 2011 बैच के आईपीएस इंदिरा कल्‍याण एलेसेला व वर्ष 2015 बैच के यू उदय किरण जैसी किस्‍मत आईपीएस जितेंद्र शुक्‍ला की नहीं है। सरकार ने एलेसेला को गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) के पुलिस अधीक्षक पद से स्‍थानांतरित करते हुए बेमेतरा का पुलिस अधीक्षक बनाया है। इसी तरह किरण को पुलिस मुख्‍यालय से निकाल कर जीपीएम का नया एसपी नियुक्‍त किया है।

दोनों अधिकारी पूर्व से विवादित रहे हैं। उदय किरण नारायणपुर में जब पुलिस अधीक्षक बतौर पदस्‍थ थे तब सिपाही की कथित पिटाई के मामले में विवादित हुए थे। उनके खिलाफ आदिवासी समाज ने तब मोर्चा भी खोल दिया था। इसी तरह बलौदाबाजार पुलिस अधीक्षक रहने के दौरान आईपीएस एलेसेला विवादों से घिरे थे।

तब एक पुलिस सिपाही का कथित ऑडियो वायरल हुआ था जिसमें वह सिपाही से अभद्रतापूर्वक बात करते हुए नजर आ रहे थे। तुरंत बाद तब 7 आईपीएस अफसरों के ट्रांसफर में एलेसेला को बलौदाबाजार से हटाकर 11वी वाहिनी छत्‍तीसगढ़ सशस्‍त्र बल जांजगीर चांपा भेज दिया गया था।

बहरहाल, कल की सूची में जिनके नाम स्‍थानांतरित होने वाले अधिकारियों के रूप में शामिल किए गए हैं उनमें वर्ष 2008 बैच की श्रीमति मिलना कुर्रे का भी नाम शामिल है। उनसे पुलिस अधीक्षक (रेल) का प्रभार लेकर इसे बेमेतरा पुलिस अधीक्षक रहे धर्मेंद्र सिंह छवई को दे दिया गया है। मिलना के पास आदिम जाति कल्‍याण के उप पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस मुख्‍यालय रायपुर का प्रभार यथावत रहेगा।

अब तक सहायक पुलिस महानिरीक्षक पुलिस मुख्‍यालय रायपुर रहे सूरज सिंह परिहार (2015) को 4थी वाहिनी छत्‍तीसगढ़ सशस्‍त्र बल माना का सेनानी बनाकर भेजा गया है। राज्‍य प्रशासनिक सेवा के अफसर झाडूराम साहू जो कि पुलिस अधीक्षक गरियाबंद के पद पर पदस्‍थ थे को छत्‍तीसगढ़ सशस्‍त्र बल की 7वीं वाहिनी का सेनानी बनाकर भेज दिया गया है।

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