चाल,चरित्र और चाटुकारिता का बदसूरत चेहरा एसके मिश्रा

विजया पाठक
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प्रदेश की शिवराज सरकार में एक ऐसा प्रमोटी आइएएस अफसर उभरा था जो चाल, चरित्र और चाटुकारिता के लिए अपने स्वाभिमान और आत्मा को बेच डालता था।

जी हां छोटू मिश्रा के नाम से प्रसिद्ध एसके मिश्रा के अपने कार्यकाल में इतने काले कारनामें किए हैं कि जिनकी लंबी फेहरिस्त तैयार की जा सकती है।

चरित्रहीनता, भ्रष्टाचार और नीचता उसके रग-रग में बसी थी। इस अधिकारी ने पॉवरफुल कुर्सी पर बैठकर सरकार को करोड़ों रूपये का चूना लगाया है।

यही नहीं चाटुकारिता के बल पर सीएम शिवराज का दाहिना हाथ भी बन गया था और इसका इस अफसर ने जमकर फायदा भी उठाया।

रिटायर्डमेंट के बाद भी मिश्रा की सरकार में तूती बोलती थी क्योंकि सीएम का खास होने से अच्छे पदों पर आसीन रहा।

वहीं प्रदेश की तात्कालीन सरकार ने मिश्रा को उद्योग विभाग के एक छोटे अधिकारी से प्रमोट कर आईएएस अधिकारी बनाकर बड़ी भूल की थी। जिसका खामियाजा सरकार ने कई सालों तक भुगता।

आज यह अधिकारी अपनी करतूतों और कारनामों के कारण फिर कुख्यात चर्चा पा रहा है। मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का प्रमुख सचिव रहा एसके मिश्रा हनीट्रेप में फंस गया है।

हनीट्रेप मामले में उसका एक ऑडियो जारी हुआ है। इसकी अभी जांच नहीं हो पाई है लेकिन इसकी नायिका श्वेता स्पवनिल जैन के साथ वह अश्लील बातचीत करते हुए सुनाई दे रहा है।

उल्लेखनीय है कि प्रिंसिपल सेक्रेटरी रहे एसके मिश्रा अब सेवानिवृत्त हो चुका है। एक समय उनकी मध्यप्रदेश की प्रशासनिक लॉबी में तूती बोला करती थी।

तब वह तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के बेहद नजदीकी माने जाते थे। इस बार फिर वह गलत कारणों से चर्चा में है।

हनीट्रैप में शामिल रही श्वेता स्वपनिल जैन से हुई उनकी अंतरंग बातचीत का एक ऑडियो इन दिनों जबरदस्त चर्चा बटोर रहा है। ऑडियो में जो कुछ है वह आंख खोल देने के लायक है।

प्रशासनिक गलियारे में छोटू के नाम से चर्चित रहे एसके मिश्रा के पास तत्कालीन शिवराज सिंह सरकार के समय जनसंपर्क विभाग भी था। उस समय वह पब्लिक रिलेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर हुआ करता था।

प्रमोटी आईएएस मिश्रा 30 सितंबर 2017 को रिटायर्ड हो चुका है। उस वक्त मिश्रा के पास दो नंबर हुआ करते थे, 99716-86921 और 94251-85550 उनके नाम से आवंटित बताए जाते हैं।

इन्हीं दो नंबरों से उन्होंने कथित तौर पर श्वेता जैन से ये बातचीत की है। यह तथ्य पहले ही सामने आ चुका है कि सुंदरियों को मुक्त हस्त से तात्कालिक सरकार का ये अधिकारी सरकारी धन का दुरुपयोग कर लाभ पहुंचाते रहा है।

सुंदरियों के द्वारा संचालित एनजीओ को करोड़ों रुपए लुटाया गया। यही नहीं उनके पार्टनरशिप और स्वामित्व वाले कंपनियों को ठेके और सप्लाई का ऑर्डर देकर साथ ही सुंदरियों के द्वारा सुझाए गए व्यक्तियों और कंपनियों को सरकारी नियम कानून को ताक में रखकर लाभान्वित किया गया।

प्रमोटी आईएएस मिश्रा 30 सितंबर 2017 को रिटायर्ड होने के बाद मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव बनाया गया। इस पद पर उनकी संविदा नियुक्ति के प्रस्ताव को शिवराज सरकार की नई संविदा नियुक्ति नीति के तहत तैयार किया था।

यह पहला मौका था, जब राज्य सरकार ने प्रमुख सचिव के पद पर संविदा नियुक्ति को मंजूरी दी थी। अब उस समय के नेताओं से भी सरकार बर्बाद हुए करोडों रूपयों की उगाही करनी चाहिए जिन्होंने मिश्रा जैसे अधिकारियों को फलने फूलने का मौका दिया।

पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान का प्रमुख सचिव रहा एसके मिश्रा को आयकर विभाग ने नोटिस जारी किया था। ये अधिकारी एमपी एग्रो में प्रबंध संचालक के पद पर रह चुका है।

सूबे के पांच बड़े आईएएस अधिकारियों के ऊपर आरोप लगा था कि उन्होंने 2012 से 2015 के बीच राज्य निदेशालय के जनसम्पर्क अधिकारी (डीपीआर) के पद पर रहते हुए सरकारी खजाने से लगभग 235 नकली और अवैध वेबसाइटों को सरकारी नीतियों का प्रचार करने के लिए 78 करोड़ रुपये विज्ञापन के रूप में बांटकर एक संगठित घोटाला किया था।

उन पांच अधिकारियों में एसके मिश्रा प्रमुख कर्ताधर्ता थे। चौहान सरकार ने इस घोटाले को दबाने के लिए अपना सबकुछ दांव पर लगाया था।

यही नहीं जिन आईएएस अधिकारियों के खिलाफ शिकायतें की गई हैं, उनमें से एक मिश्रा शिवराज सिंह चौहान के प्रमुख सचिव के रूप में कार्यरत था। इस घोटाले की पहली ख़बर दो साल पहले आयी थी।

फिर भी इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है और मूल शिकायतकर्ता बार-बार अदालत के और एमपी पुलिस के आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्लू) के चक्कर लगा कर परेशान हो चुके हैं।

चुनावों में यह मुद्दा न उछले इसके लिए उन पत्रकारों के खिलाफ जारी जांच को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया जो कि इस फर्जीवाड़े में शामिल हैं।

एसके मिश्रा पर खनिज माफिया से मिलीभगत कर सरकार को करोड़ों की खनिज राजस्व हानि कराने के आरोप है। लोकायुक्त में भी मामला दर्ज है।

भूमि घोटाले में चालान पेश करने की सरकार अनुमति नहीं दे रही है। पूर्व मुख्यमंत्री का वरदहस्त होने से फिलहाल ये सुरक्षित है।

( शेष आगामी दिनों में )

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