बेरोजगारी और निय‍मि‍तीकरण फिर मुद्दा बनने लगे

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नेशन अलर्ट/रायपुर.

प्रदेश के शिक्षित युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण ने विधानसभा चुनाव के ठीक पहले अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। भाजपा इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने कोई कसर नहीं छोड़ रही है। ताजा मामला छत्‍तीसगढ़ मंत्रालय परिसर से जुड़ा हुआ है जिस पर ट्वीटर वार होने लगा है।

उल्‍लेखनीय है कि वर्ष 2018 में तमाम मुद्दों सहित युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण को तब विपक्ष में रही कांग्रेस ने अपना धारदार हथियार बनाया था। उस समय सरकार में बैठी रही भाजपा को इस विषय ने इस तरह से लपेटा था कि 65+ का लक्ष्‍य लेकर चुनाव मैदान में उतरी भाजपा महज 15 सीटों पर सिमट गई थी। तस्‍वीर अब बदल गई है… अब भाजपा विपक्ष में है और कांग्रेस सत्‍ताधारी दल… लेकिन नहीं बदली है तो बेरोजगारी की समस्‍या और नियमितीकरण का मसला।

खाद्य विभाग में चालक था मरने वाला युवक

20 सितंबर का दिन… दोपहर का वक्‍त रहा होगा। मंत्रालय परिसर में खाद्य विभाग के अफसरों से मिलने एक युवक आया हुआ था। बताया जाता है कि यही युवक खाद्य विभाग में चालक की नौकरी किया करता था। कुछ दिनों पूर्व उसे विभाग ने अपनी नौकरी से हटा दिया था। युवक गिरती हुई आर्थिक परिस्थिति के बीच खुद के बेरोजगार होने के चलते काफी दिनों से बहुत व्‍यथित था।

दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के संगठन ने अभी हाल ही में हड़ताल भी की थी। बताया जाता है कि इसी हड़ताल में योगेश नामक उक्‍त युवक भी शामिल हुआ था। बेरोजगारी ने उसे इतना परेशान किया कि उसने अपनी जान मंत्रालय परिसर में जहां पार्किंग है वहां लगे एक पेड़ पर अपना गमछा डालकर उसे फंदा बनाकर उसमें झूलते हुए दे दी।

युवक के परिजन बताते हैं कि उसे विभाग से कुछ बकाया वेतन भी लेना था। संभवत: इसी के लिए वह खाद्य विभाग के उन अफसरों से मिलने आया रहा होगा जहां कि वह गाड़ी चलाया करता था। युवक की मौत ने दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी संगठन को इस कदर आक्रोशित किया कि संगठन के सदस्‍य एक जगह एकत्र हो गए। एकत्रित कर्मचारियों ने जमकर नारेबाजी शुरू कर दी।

आनन फानन में पहुंची पुलिस ने युवक के शव को पोस्‍टमार्टम के लिए रवाना किया। पुलिस अब कह रही है कि वह इस सुसाइड केस में खाद्य विभाग के उन अधिकारियों से भी पूछताछ करेगी जिन्‍होंने योगेश को काम से हटा दिया था। पुलिस ने दैनिक वेतनभागी कर्मचारियों के अन्‍य सदस्‍यों को किसी तरह समझा बुझा कर उन्‍हें अपने अपने विभागों में भेजा।

राजनीतिक हुआ मसला

बेरोजगार योगेश की आत्‍महत्‍या के मसले पर अब राजनीति के रंग चढ़ने लगे हैं। पूर्व मुख्‍यमंत्री डॉ.रमन सिंह ने इस विषय पर छत्‍तीसगढ़ सरकार को घेरने में कोई कमी नहीं की। डॉ.रमन लिखते हैं कि ‘फिर एक बेरोजगार ने आत्‍महत्‍या कर ली। बेशर्म और संवेदनहीन भूपेश सरकार अब भी सबसे कम बेरोजगारी के घटिया प्रदर्शन में लगी है’।

अपने मुख्‍यमंत्री रहने के दिनों में सैकड़ों हजारों युवकों को दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में रखने वाले डॉ.रमन सिंह अब नियमि‍तीकरण के मसले पर सरकार से सवाल कर रहे हैं। उन्‍होंने अपने ट्वीटर अकाउंट में लिखा है कि ‘नियमितीकरणा के वायदे का क्‍या हुआ ? पांच लाख रोजगार का क्‍या हुआ ? बेरोजगारी भत्‍ते का क्‍या हुआ ? मुख्‍यमंत्री जी सुनाई और दिखाई देता है या नहीं ?’

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