अंततः गुरु पर भारी पड़ ही गया चेला !

शेयर करें...

नेशन अलर्ट / 97706 56789

रायपुर.

अंतत: गुरू गुड़ ही रह गया और चेला चीनी साबित हो गया. यह अलग बात है कि अभी किए गए फेरबदल में चेले की जगह बदली है लेकिन इसके बावजूद वह अपनी फिरकी में फंसाने में मिली सफलता का जश्न तो मना ही सकता है.

उल्लेखनीय है कि सस्पेंडेड आईपीएस मुकेश गुप्ता और सरकार के बीच छह छत्तीस का व्यवहार लगातार जारी है. कभी मुकेश को सफलता मिलती है तो कभी सरकार को.

प्रदेश में जिस दिन कांग्रेस की सरकार ने कामकाज संभाला था उसी दिन से आईपीएस मुकेश गुप्ता के दिन बदल गए. पहले वह ईओडब्ल्यू-एसीबी से हटाए गए.

इसके बाद उन्हें निलंबन की कार्रवाई झेलनी पडी़. फिर वह एक के बाद एक मामलों में फंसते चले गए. इसी दौरान उनके प्रभाव वाले एमजीएम हास्पिटल के प्रकरण को लेकर अपराध क्रमांक 18 / 2020 दर्ज किया गया.

यह प्रकरण उसी ईओडब्ल्यू-एसीबी में दर्ज हुआ था जहां के कभी मुकेश गुप्ता प्रभारी हुआ करते थे. सस्पेंडेड आईपीएस गुप्ता सहित उनके वयोवृद्ध पिता जयदेव गुप्ता के अलावा एमजीएम हास्पिटल की कर्ताधर्ता दीपशिखा अग्रवाल आरोपी बनाए गए थे.

जीपी के समय दर्ज हुआ था अपराध

प्रदेश के इक्का दुक्का ईमानदार अधिकारियों में शामिल आईपीएस जीपी सिंह के समय यह अपराध दर्ज किया गया था.

आईपीएस जीपी सिंह को जांबाज अफसर माना जाता है. कर्त्तव्यनिष्ठता ऐसी है कि वह हर उस व्यक्ति के खिलाफ रहते हैं जोकि कहीं न कहीं किसी न किसी रुप में गलत है.

फिर चाहे वह मुकेश गुप्ता ही क्यूं न हों जिससे एक समय जीपी सिंह ने बहुत कुछ सीखा था. तब प्रदेश के पुलिस महकमे में मुकेश गुप्ता को गुरू और जीपी सिंह को चेला कहकर पुकारा जाता था.

सिंह ने पकडी़ थी करोड़ों की गड़बड़ी

उल्लेखनीय है कि जीपी सिंह ने ही करोड़ों की गड़बड़ी एमजीएम हास्पिटल के संदर्भ में पकडी़ थी. सूक्ष्मता से सघन जांच के ही बाद जीपी के निर्देश पर ईओडब्ल्यू-एसीबी ने भादंवि की धारा 420, 406 और 120 (बी) के अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत एफआईआर दर्ज की थी.

इस मामले में मिक्की गुप्ता मेमोरियल हॉस्पिटल के प्रमुख ट्रस्टी और निलंबित आईपीएस मुकेश गुप्ता के पिता जयदेव गुप्ता की याचिका आज अंतत: हाईकोर्ट ने खारिज कर दी. इसमें उन्होंने तीन करोड़ रुपए के घोटाले के खिलाफ आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो द्वारा दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग की थी.

यह भी पढे़ं :   http://www.nationalert.in/?p=9029

उल्लेखनीय है कि ईओडब्ल्यू ने तीनों पर गरीबों का नि:शुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन कराने, शासकीय कर्मचारियों को विशिष्ट चिकित्सा सुविधा का लाभ देने, मेडिकल स्टॉफ को प्रशिक्षण देने के नाम पर साल 2006 में दो करोड़ और 2007 में शासन से प्राप्त एक करोड़ रुपए की अनुदान राशि के दुरूपयोग का मामला दर्ज किया था.

एफआईआर में यह तथ्य शामिल था कि जयदेव व उनके पुत्र मुकेश सहित दीपशिखा ने इस अनुदान राशि का दुरुपयोग करते हुए ट्रस्ट के बैंक कर्ज इससे अदा किए थे. एफआईआर पर ईओडब्ल्यू ने अभी कोई कार्रवाई शुरु भी नहीं की थी कि जयदेव गुप्ता इसे खारिज कराने हाईकोर्ट पहुंच गए थे.

उस समय भी नेशन अलर्ट ने प्रमुखता से खबर का प्रकाशन किया था. तब उसने लिखा था कि क्या जीपी की फिरकी में उलझेंगे मुकेश ? . . .और हुआ भी वही . . . 9 जून को सुरक्षित रखे गए फैसले को जब आज सुनाया गया तो साबित हुआ कि जीपी शेर, मुकेश ढेर !

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *