बस्तर को नक्सलियों ने बारूद की भूमि बना दिया

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जगदलपुर.

सुकमा जिले में हुए आईईडी ब्लास्ट में मारे गए ग्रामीण की मौत पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बस्तर आईजी विवेकानंद सिंहा ने कहा कि माओवादियों का असली अमानवीय चेहरा उजागर हो चुका है। ग्रामीणों को विकास एवं शांतिपूर्वक जीवन-यापन करने की जरूरत है न कि माओवादियों की।

सिन्हा ने कहा कि माओवादियों की करतूतों से यह स्पष्ट हो चुका है कि वे ग्रामीणों का शोषण, अत्याचार करने एवं उनकी जान लेने पर तुले हुये हैं। ग्रामीणों के हितों से माओवादियों का कोई वास्ता नहीं है। वे अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए किसी भी हद को पार कर सकते हैं। अब ग्रामीणों को जागने का वक्त आ चुका है।

उल्लेखनीय है कि जिला सुकमा अंतर्गत थाना भेजी से 1.5 किमी. की दूरी पर एलारमडग़ू मार्ग के किनारे नक्सली पर्चा पड़ा हुआ था। ग्रामीण सोढ़ी देवा द्वारा उठाने के दौरान माओवादियों द्वारा लगाये गये आईईडी के विस्फोट होने से घटना स्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

सिन्हा ने कहा कि माओवादियों द्वारा आये दिन निर्दोष ग्रामीणों की जाने ली जा रही है। पूर्व में माओवादियों द्वारा लगाये गये आईईडी की चपेट में आने से दिनांक 21.09.2018 को जिला सुकमा अंतर्गत थाना चिंतागुफा के ग्राम बुरकापाल क्षेत्र में ग्रामीण सोढ़ी कोसा की मृत्यु हो गई थी, जिसका शव आईईडी विस्फोट से क्षत-विक्षत हो गया था।

इसी प्रकार दिनांक 14.11.2018 को जिला सुकमा अंतर्गत चिंतागुफा क्षेत्र में ग्रामीण सोढ़ी राहुल एवं दिनांक 07.01.2018 को जिला बीजापुर अंतर्गत थाना गंगालूर के ग्राम बुरजी क्षेत्र में 02 ग्रामीण महिलायें गंभीर रूप से घायल हो गयी थीं।

अंदरूनी संवेदनशील क्षेत्रों में माओवादियों द्वारा लगाये गये आईईडी की चपेट में आने से अब तक काफी तादाद में ग्रामीण मारे गये हैं एवं अपने हाथ, पांव गंवा चुके हैं। अंदरूनी क्षेत्रों में माओवादियों द्वारा घटित कुछ घटनाओं के बारे में पता भी नहीं लग पाता है।

उन्होंने कहा कि माओवादी क्षेत्र में भय एवं आतंक का माहौल निर्मित करने की नीयत से कोई न कोई बहाना कर भोले-भाले, निर्दोष ग्रामीणों की निर्दयतापूर्ण हत्या कर रहे हैं। माओवादियों द्वारा अपने आप को आदिवासी ग्रामीणों के हितैषी होने का दावा किया जाता है, वहीं दूसरी ओर उनके द्वारा निर्दोष ग्रामीणों की नृशंसतापूर्वक हत्याएं की जा रही हैं।

माओवादी वृद्धों, महिलाओं एवं बच्चों को भी नही बख्शते। इन्हें भी अपनी हिंसा एवं दरिंदगी का शिकार बनाया है। यही नहीं बल्कि माओवादी अंदरूनी क्षेत्रों में विकास कार्यों में व्यवधान उत्पन्न करते हुये ग्रामीणों को उनकी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखने में भी कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

इसके अलावा ग्रामीण भोले-भाले नवयुवक-युवतियों एवं बच्चों को भी डरा-धमका कर जबरदस्ती अपने संगठन में भर्ती कर एवं अपनी अपराधिक गतिविधियों में शामिल कर भविष्य को बर्बाद कर रहे हैं।(सुधीर जैन)

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