तबादला उद्योग में उपेक्षित हुआ आदिवासी नेतृत्व

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भाजपा – माकपा ने राज्य सरकार को घेरा

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रायपुर.

आईपीएस ट्रांसफर लिस्ट में उपजे विवाद को लेकर बीजेपी व सीपीआई एम जैसे विपक्षी दलों ने राज्य सरकार को घेरा है. भाजपा ने जहां तबादला उद्योग का मुद्दा फिर उठाया है वहीं भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ( मार्क्सवादी ) ने आदिवासी नेतृत्व की उपेक्षा का आरोप लगाया है.

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में पदस्थ अखिल भारतीय पुलिस सेवा ( आईपीएस ) के 13 व राज्य पुलिस सेवा ( एसपीएस ) के दो अधिकारियों के तबादले की सूची सोमवार को जारी हुई है.

सूची अलग अलग कारणों से विवादित बताई जा रही है. कोंडागांव पुलिस अधीक्षक से लेकर कोरबा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के स्थानांतरण पर सवाल उठाए जा रहे हैं.

प्रदेश में 15 साल तक एकछत्र राज कर चुकी भाजपा जहां इस पर, शिकायत के बाद भी अधिकारी ( आईपीएस बालाजी राव सोमावार ) के स्थानांतरण में प्रमोट होने की बात कह रही है वहीं माकपा सत्ता और संगठन की खींचतान का उल्लेख कर रही है.

भाजपा ने कहा : अध्यक्ष ने ठहराया था भ्रष्ट लेकिन . . .

भाजपा विधायक शिवरतन शर्मा इसे तबादला उद्योग से जोड़ रहे हैं. शर्मा के मुताबिक कोंडागांव
दो विधानसभा क्षेत्र वाला जिला है जबकि जशपुर तीन विधानसभा क्षेत्र वाला जिला है.

शिवरतन कहते हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम कोंडागांव जिले से ही आते हैं. जब उन्होंने बालाजी राव को भ्रष्ट अधिकारी बताते हुए उनकी शिकायत की बात की थी तो फिर उन्हें जशपुर जैसा बडा़ जिला कैसे मिल गया ?

भाटापारा विधायक शर्मा के शब्दों में यह बालाजी के लिए कोई दंड नहीं बल्कि सरकार की ओर से उन्हें दिया गया पुरस्कार है. दरअसल, छत्तीसगढ़ में सरकार नहीं है बल्कि तबादला उद्योग चलाने वाली कांग्रेस है.

जयसिंह के आगे कमजोर हैं मरकाम : माकपा

इधर माकपा ने भी तीखी टिप्पणी की है. माकपा के राज्य सचिव संजय पराते कहते हैं कि तबादला सूची को देखकर यह साबित हो गया है कि जयसिंह अग्रवाल के सामने मोहन मरकाम कमजोर हैं.

पराते के मुताबिक असल में मोहन मरकाम अध्यक्ष कम और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के चहेते ज्यादा हैं. अध्यक्षी भी उनको बघेल जी की कृपा से मिली है.

उनके अनुसार असल में चाहे कांग्रेस हो या भाजपा, सत्ताधारी पार्टी में होता यही है कि पार्टी अध्यक्ष मुख्यमंत्री की पसंद का होता है. इसलिए अध्यक्ष को यह गुमान होता है कि सत्ता संचालन के सारे सूत्र उसके हाथ में है लेकिन यह गुमान समय-समय पर टूटता भी है. मरकाम के मामले में भी यही है.

बकौल पराते हाल ही में जयसिंह अग्रवाल और मोहन मरकाम दिवंगत अजीत जोगी के विधानसभा क्षेत्र में कसरत करते दिखे हैं., जयसिंह अग्रवाल की टीएस सिंहदेव से निकटता किसी से छिपी नहीं है.

पराते कहते हैं कि वे दमदार नेता भी माने जाते हैं, जो चरणदास महंत पर भी भारी पड़ते दिखते हैं. इस दमदारी के सामने मरकाम कहीं नहीं टिकते. कांग्रेस में सत्ता की चलती है, संगठन की नहीं, इस मामले से यह स्पष्ट है.

दरअसल संगठन का पद संतुष्ट करने के लिए होता है. किसी व्यक्ति को भी और किसी समुदाय को भी. यहां मामला आदिवासी समुदाय की संतुष्टि का है. लेकिन यहां पर आदिवासी नेतृत्व उपेक्षित हो गया है.

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