गुरु जीता या चेला अब भी भारी ?

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रायपुर.

शह और मात का खेल . . . गुरु और चेले की लडा़ई . . . कभी बाजी इस तरफ तो कभी बाजी उस तरफ . . . यही चल रहा है सस्पेंडेड आईपीएस मुकेश गुप्ता व एडीजी जीपी सिंह के बीच. हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के कानों तक दोनों अधिकारियों के नाम इन दिनों जोरशोर से सुनाई दे रहे हैं.

उल्लेखनीय है कि सस्पेंडेड आईपीएस मुकेश गुप्ता से राज्य की वर्तमान सरकार के रिश्ते असहज हैं.

राज्य में सरकार बनाने के बाद कांग्रेस ने सबसे पहले मुकेश गुप्ता की ही खबर ली थी. उन्हें ईओडब्ल्यू-एसीबी से हटाकर पावरहीन किया गया.

फिर बाद में एक अन्य आईपीएस रजनेश सिंह के साथ ही आईपीएस मुकेश गुप्ता को 12 फरवरी 2019 को निलंबित कर दिया गया.

दोनों अधिकारियों ( मुकेश गुप्ता व रजनेश सिंह ) पर नान घोटाले की जांच के दौरान दर्जनों लोगों के फोन टेप करने के मामले में 11 फरवरी 2019 को की गई एफआईआर के बाद निलंबन की कार्रवाई की गई थी.

जीपी कब और कैसे इस लडा़ई में हुए शामिल

अब सवाल इस बात का कि आईपीएस जीपी सिंह इस लडा़ई में कब और कैसे शामिल हुए?

दरअसल, जब शासन ने एसआरपी कल्लूरी को ईओडब्ल्यू-एसीबी से विदा किया तो उसने इसकी कमान जाबांज व कर्त्तव्यनिष्ठ अधिकारी जीपी सिंह को सौंपी थी.

प्रदेश के इक्का दुक्का ईमानदार अधिकारियों में शामिल जीपी सिंह ने एमजीएम हास्पिटल के मामले में मुकेश गुप्ता को घेरना चालू किया.

बाद में उन्होंने एमजीएम हास्पिटल प्रकरण में इसके ट्रस्टियों मुकेश व उनके पिता जयदेव गुप्ता के अलावा अस्पताल की कर्ताधर्ता दीपशिखा अग्रवाल पर एफआईआर दर्ज कर ली.

इस पर घबराए हुए जयदेव गुप्ता बिलासपुर हाईकोर्ट यह फरियाद लेकर पहुंचे थे कि इस एफआईआर को रद्द करने का निर्देश ईओडब्ल्यू-एसीबी को दे.

लेकिन वह तो दबंग आईपीएस जीपी सिंह की मेहनत का ही नतीजा था कि हाईकोर्ट में जयदेव गुप्ता की एफआईआर रद्द कर देने वाली याचिका ही खारिज हो गई.

सुप्रीम कोर्ट में पेश नहीं हुआ सरकारी वकील

एमजीएम हास्पिटल ट्रस्ट को मिले सरकारी अनुदान में धांधली और धोखाधड़ी के इस मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट का यह फैसला आईपीएस जीपी सिंह की जीत माना जा रहा था.

याचिका खारिज होने के बाद जयदेव व पुत्र मुकेश गुप्ता और दबाव में आ गए. उन्हें कभी भी गिरफ्तार किए जाने का डर जीपी सिंह की दमदार छवि के चलते और ज्यादा सताने लगा.

थक हारकर जयदेव गुप्ता ने इसी विषय पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. उनकी ओर से नामी गिरामी वकील तो बहस करने उपस्थित थे लेकिन आश्चर्यजनक रुप से राज्य सरकार की ओर से कोई वकील प्रस्तुत ही नहीं हुआ.

अंतत: सुप्रीम कोर्ट ने एमजीएम वाले मामले में जयदेव गुप्ता व अन्य को राहत देते हुए अग्रिम आदेश तक कार्रवाई पर रोक लगा दी है. स्थगन आदेश देते हुए कोर्ट ने सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने चार सप्ताह का समय दिया है.

बहरहाल, अब सवाल जीपी सिंह की उस मेहनत का क्या होगा जो उन्होंने एमजीएम हास्पिटल केस में की थी से जुडा़ हुआ है.

राज्य सरकार की ओर से किसी भी वकील के खडे़ नहीं होने के चलते जयदेव , पुत्र मुकेश गुप्ता व दीपशिखा अग्रवाल को भले ही राहत मिल गई हो लेकिन जाबांज जीपी का भूत आज भी उन्हें डराता ही होगा.

सस्पेंडेड आईपीएस मुकेश गुप्ता को एक समय जीपी सिंह का गुरु पुलिस मुख्यालय के अंदर-बाहर माना जाता था.

. . . लेकिन जीपी ने अपनी लाइन इतनी लंबी कर ली कि उनके कथित गुरु गुड ही रह गए और चेला चीनी हो गया.

. . . तो क्या यह गुरु ( मुकेश गुप्ता ) की जीत है या फिर उन पर अभी भी चेला ( जीपी सिंह ) भारी पड़ रहा है ?

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