भाजपा के जख्म नासूर हो रहे, इस्तीफे का दौर भी शुरु हुआ

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रायपुर.

चुनाव में मिली एकतरफा हार के बाद भाजपा संभलती नजर नहीं आ रही है. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक के बयान पर भाजपा में नाराजगी देखी जा रही है. वहीं अन्य मंत्री व नेता भी हार का ठीकरा पूर्ववर्ती सरकार व वरिष्ठों पर फोड़ रहे हैं.

इस बीच कांग्रेस भी भाजपा में मची इस आपाधापी का मजा ले रही है. यहां तक की मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्वयं ट्वीट कर कौशिक के बयान की आलोचना कर दी. इसके बाद भाजपा के तेवर और चढ़ गए हैं. शनिवार को विधायक व भाजपा प्रवक्त शिवरतन शर्मा ने तो मुख्यमंत्री को नसीहत तक दे डाली.

शिवरतन ने किया पलटवार

हुआ यूं कि बीते दिनों भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने चुनाव में हार की वजह कार्यकर्ताओं के काम न करने को बताया. इसे लेकर मुख्यमंत्री बघेल ने इसे कार्यकर्ताओं का अपमान करार दिया. उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा था कि ऐसे बयान के बाद यह किसी पार्टी का अंदरुनी मसला नहीं रह जाता और वे कार्यकर्ताओं का अपमान बर्दास्त नहीं कर सकते.

मुख्यमंत्री के इस ट्वीट के बाद अब विधायक व प्रवक्ता शिवरतन शर्मा ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को अपनी पार्टी की चिंता करने और अपने काम पर ध्यान देने की नसीहत दी है. पार्टी ने कहा है कि जिस कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र के नाम पर एक परिवार की चरण वंदना ही राजनीतिक चरित्र बन गई है, उस पार्टी के मुख्यमंत्री भाजपा को लोकतंत्र का पाठ पढ़ाते शोभा नहीं देते.

शर्मा, शुक्ल, वोरा का राग छेड़ा

इस दौरान शर्मा ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं के मान-अपमान की चिंता का प्रपंच रचने के बजाय मुख्यमंत्री बघेल पहले खुद तो अपने कार्यकर्ताओं व विधायकों के मान-सम्मान की फिक्र कर लें. जो पार्टी और उस पार्टी के मुख्यमंत्री अपने वरिष्ठ विधायकों सत्यनारायण शर्मा, अमितेष शुक्ल और अरुण वोरा को हाशिए पर रखकर चल रहे हैं, जो मुख्यमंत्री अपने वरिष्ठ व अनुभवी विधायकों को लोकसभा चुनाव लड़ाकर किनारे लगाने के फार्मूले की रणनीति बना रहे हैं, वे भाजपा के आंतरिक लोकतंत्र को लेकर प्रलाप कर रहे हैं.

न मिला सम्मान न काम, दिया इस्तीफ

दूसरी ओर भाजपा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य डॉ शिवनारायण द्विवेदी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. इसके साथ ही उन्होंने संगठन और पूववर्ती सरकार को निशाने पर लिया है.

अपने इस्तीफे के बाद उन्होंने कहा कि इसकी मुख्य वजह भाजपा में कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और कार्यकर्ताओं पर हार ठिकरा फोडऩे वाले बयान है जिससे वे आहत हैं.
डॉ द्विवेदी ने भाजपा को आड़े हाथों लिया है.

उन्होंने कहा कि सरकार का घमंड पार्टी को चुनाव में ले डूबी. ना सरकार में कार्यकर्ताओं को पूछता था और ना ही संगठन में कोई सुनवाई होती थी. उन्होंने बताया कि प्रदेश कार्यसमिति का सदस्य होने के बावजूद उन्हें कभी बैठक में नहीं बुलाया गया.

वे आगे कहते हैं कि मैं रायपुर पश्चिम का निवासी हूं लेकिन यहां से चुनाव लड़ रहे राजेश मूणत ने उन्हें एक दफा भी चुनाव में काम करने के लिए नहीं कहा. वे कहते हैं कि घमंड तो इतना था कि पूछिये मत, इन्हें लगता था कोई हरा नहीं सकता.

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