छोटे दलों से मुकाबले को तैयार कांग्रेस, दो दर्जन सीटों को लेकर कवायद जारी

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भोपाल।

मप्र में करीब डेढ़ दशक बाद सत्ता में वापसी की कवायद में लगी कांग्रेस के सामने दो दर्जन सीटें भारी मुसीबत बनी हुई हैं। यह वे सीटें हैं जहां गत विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उमीदवारों को स्थानीय दलों ने पार्टी प्रत्याशियों को मुकाबले से ही बाहर कर दिया था। इनमें से कई सीटों पर भाजपा के अलावा बसपा व निर्दलियों ने भी जीत हासिल की थी। इन सीटों पर छोटे दलों का प्रभाव माना जाता है। जहां उनका मुकाबला भाजपा से पूरी तरह से हुआ था।

यही वजह है कि इस बार कांग्रेस के लिए इन सीटों पर प्रत्याशी चयन का काम मुसीबत बना हुआ है। अगर बीत चुनाव के आंकड़ों का विशलेषण किया जाए तो प्रदेश की 56 से ज्यादा ऐसी सीटें हैं जहां का परिणाम तीसरा उम्मीदवार प्रभावित करता है। बसपा, सपा व गोंगपा से गठबंधन की उम्मीदें समाप्त होने के बाद कांग्रेस के लिए इन सीटों पर नए सिर से रणनीति बनाना बेहद कठिन हो गया है। इनमें कुछ सीटों पर कांग्रेस के पास मजबूत प्रत्याशी तो हैं, लेकिन उनके चयन पर गुटबाजी भरी पड़ती दिख रही है। इसी तरह भाजपा के लिए भी इन सीटों पर दोहरी चुनौती बनी हुई है। वजह है इनमें से सात सीटों पर अन्य बसपा और निर्दलीयों का कब्जा होना।

यहां बसपा से मुकाबला
प्रदेश की चार सीटें बसपा के पास हैं। इनमें से तीन सीटों पर भाजपा प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे थे, जबकि एक सीट दिमनी पर कांग्रेस प्रत्याशी रवींद्र सिंह तोमर दूसरे नंबर पर थे। यहां बसपा के बलवीर दंडोतिया विधायक हैं। अंबाह में बसपा के सत्यप्रकाश विधायक हैं। यहां दूसरे नंबर पर भाजपा के बंसीलाल जाटव थे। रैगांव में बसपा की ऊषा चौधरी विधायक हैं। यहां दूसरे नंबर पर भाजपा के पुष्पराज बागरी थे। मनगवां से बसपा की शीला त्यागी विधायक हैं। यहां दूसरे नंबर पर भाजपा की पन्नाबाई थीं।

यह रही थी बीते चुनाव में स्थिति
2013 में भाजपा की जीत वाली 19 सीटों पर कांग्रेस दूसरे नंबर पर भी नहीं आ पाई। 11 सीटों पर बसपा दूसरे नंबर पर थी। दो सीटों पर सपा और छह सीटों पर अन्य दल दूसरे नंबर पर थे। यहां दूसरे नंबर पर आना भी कांग्रेस के लिए चुनौती है। वहीं, इंदौर-1 सहित कुछ सीटों पर कांग्रेस नेता बागी होकर लड़े थे, जिससे कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ा था।

यहां बसपा दूसरे नंबर पर
श्योपुर, सुमावली, मुरैना, भिंड, महाराजपुर, पन्ना, रामपुर-बघेलान, सेमरिया, देवतालाब, रीवा और कटंगी।

यहां सपा नंबर टू
निवाड़ी और बालाघाट।

यहां अन्य दूसरे नंबर पर
देवसर, मानपुर, गाडरवाड़ा, बड़वाह, इंदौर-1, महिदपुर और जावद।

निर्दलीय यहां पड़े थे भारी
तीन सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी भारी पड़े थे। दो में भाजपा और एक पर कांग्रेस प्रत्याशी दूसरे नंबर पर थे।
इनमें सिवनी में दिनेश राय मुनमुन के मुकाबले दूसरे नंबर पर भाजपा के नरेश दिवाकर, सीहोर में सुदेश राय के सामने दूसरे नंबर पर भाजपा की ऊषा सक्सेना और थांदला में कलसिंह के सामने दूसरे नंबर पर कांग्रेस के गेंदालाल डामोर थे। यहां सुदेश कांग्रेस में थे, लेकिन टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर लड़े थे। बाद में भाजपा के सपोर्ट से जीते थे।

हर विधानसभा सीट के लिए रणनीति तैयार की गई है। जहां दूसरे दलों का प्रभाव है, वहां भी मजबूत प्रत्याशी उतारेंगे।
कमलनाथ, अध्यक्ष, प्रदेश कांग्रेस

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