हनी ट्रैप : फिर बोतल से बाहर आने को जिन्न तैयार !

31अगस्त को सेवानिवृत हो रहे एसआईटी चीफ, अदालत में सौंपी है सूची

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भोपाल.

मध्यप्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक क्षेत्र को हिलाकर रख देने वाले हनी ट्रैप का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर निकलता नज़र आ रहा है. एसआईटी चीफ ने अदालत में एक लिफाफा सौंपा है जिसमें कई आईएएस-आईपीएस अधिकारियों के अलावा दो रिटायर्ड एडिशनल चीफ सेक्रेट्री के साथ एक पूर्व मंत्री का भी नाम बताया जाता है.

उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश के अलावा पडो़सी राज्य छत्तीसगढ़ में अधिकारी-कर्मचारियों, नेताओं-कार्यकर्ताओं से लेकर आम जनमानस के बीच हनी ट्रैप ने बहुत चर्चा बटोरी थी.

चर्चा इस कदर बढ़ गई थी कि राज्य की तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने इसकी गुत्थी सुलझाने के लिए विशेष जांच दल ( एसआईटी ) का गठन किया था.

वर्मा-शर्मा के बाद कुमार को कमान

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल व इंदौर के बहुचर्चित हनी ट्रैप कांड ने लगता है अब तक इसमें कथित तौर पर शामिल रहे नेताओं-अधिकारियों का पीछा नहीं छोडा़ है.

दरअसल, मामले को सुलझाने में राज्य सरकार से भी बेवजह की गल्तियां हुईं जिस कारण इस प्रकरण ने राज्य से निकलकर पूरे देश की मीडिया में अपनी जगह बना ली.

पहले तो सरकार ने आनन फानन में एसआईटी गठित कर दी और बाद में इसके चीफ को लेकर इतना कुछ गलत हो गया कि न्यायालय को भी प्रकरण में हस्तक्षेप करना पडा़.

प्रदेश के बहुचर्चित हनी ट्रैप मामले की जांच के लिए पुलिस मुख्यालय द्वारा बनाई गई एसआईटी का चीफ सबसे पहले आईजी डी. श्रीनिवास वर्मा को बनाया गया था.

अभी उनकी नियुक्ति को 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि उनके स्थान पर एडीजी संजीव शर्मा को इसकी कमान सौंप दी गई.

आईपीएस संजीव शर्मा के नेतृत्व में जांच आगे बढ़ पाती उससे पहले ही सरकार ने राजेंद्र कुमार को एसआईटी चीफ बना दिया.

मतलब एसआईटी चीफ के रुप में दूसरी मर्तबा फेरबदल किया गया. बार-बार एसआईटी चीफ बदले जाने पर हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि बिना अनुमति के एसआईटी में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा.

कुमार के बाद कौन ? हाईकोर्ट तय करेगा

ज्ञात हो कि आईपीएस राजेंद्र कुमार का रिटायरमेंट इस महीने के अंत में है. कुमार के बाद एसआईटी की कमान किसकी हाथों में रहती है यह देखना होगा.

हालांकि हाईकोर्ट ही इस मामले के लिए गठित एसआईटी के चीफ का नाम तय करेगा. फिलहाल इसमें जिन दो नामों की चर्चा सुनाई दे रही है उसमें से एक एसआईटी मेंबर ही हैं.

प्रशासनिक व न्यायिक क्षेत्र के जानकार बताते हैं कि कोर्ट एसआईटी के सदस्य एडीजी मिलिंद कानसकर को चीफ बनाए इसकी संभावना ज्यादा नज़र आती है.

सरकार की सिफारिश पर स्पेशल डीजी अरुणा मोहन राव का भी नाम जिम्मेदारी संभालने वालों में सुनाई पड़ रहा है. फिर भी अभी कुमार द्वारा सौंपी गई सूची चर्चा में है.

44 के नाम ?

आईपीएस कुमार इस माह की 31 तारीख को सेवानिवृत हो रहे हैं. समझा जाता है कि इसी के मद्देनज़र कुमार ने अभी हाल ही में इक सूची हाईकोर्ट में जमा कराई है.

अब इस सूची में किन किन अधिकारियों के नाम है यह तो नहीं मालूम लेकिन चर्चा के बाजा़र में “44 शौकीन” जैसे शब्द तैर रहे हैं.

इसके बाद से ही मध्य प्रदेश की सियासत गरमा गई है. पुलिस मुख्यालय से लेकर मंत्रालय तक में इन नामों को लेकर चर्चा बनी हुई है. यदि इन नामों की जांच की जाती है तो कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं जो प्रदेश में हलचल मचा देंगे.

बहरहाल, इस मामले में पुलिस श्वेता जैन, बरखा भटनागर और श्वेता स्वप्निल जैन को पहले गिरफ्तार कर चुकी है लेकिन जिन कथित नामों को लेकर चर्चा हो रही है उनमें से किसी से आज दिनांक तक किसी तरह की कोई पूछताछ नहीं हुई है.

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