सेनिटाईजर : जिला पंचायत ने भेजा, खैरागढ़ जनपद ने बांटा लेकिन पंचायतों के मद से काटी गई राशि

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बंटी तिवारी

खैरागढ़.

ब्लॉक के ज्यादातर ग्राम पंचायतों में जनपद के कतिपय अधिकारियों के सरंक्षण मे कोरोना की आड़ में लाखों का गोलमाल चल रहा है. कहीं सेनिटाईजर के नाम पर तो कही स्प्रे मशीन जबर्दस्ती थमाकर सीघे एकाऊंट से भुगतान काटा जा रहा है, जिसके चलते छोटे मैदानी कर्मचारियों की जान सांसत में आ गई है.

पता चला है कि जो स्प्रे मशीन खुले बाजार में 15 हजार में मिल जाती है उसे आठ पंचायतों के बिना मांगें जरूरत की चीज बताकर 85 हजार 950 रूपए में थमाया गया है.

आश्चर्यजनक बात यह है कि जिम्मेदार इससे पल्ला झाड़ रहे हैं. 14 वें वित्त आयोग की राशि से पंचायत को प्रस्ताव पारित कर सामग्री क्रय करने का अधिकार है परंतु वाजिब कीमत के सामान को आठ गुना बढ़े दाम में खरीदने का अधिकार इन्हें किसने दिया है बताने में आनाकानी कर रहे हैं.

पंचायतों के ऊपर जिम्मेदारों ने खरीदी को लेकर दबाव बनाया औऱ मामला संज्ञान में आने पर कन्नी काट रहे हैं. उनका तो यह कहना है कि सेनिटाईजर औऱ स्प्रे मशीन जिला पंचायत से मिली है.

वैश्विक महामारी कोविड 19 के प्रकोप से दुनिया के ज्यादातर देश हताश परेशान होकर लोगों को बचाने राहत के नित नए उपाय अपनाकर सरकारी खजाने का मुंह खोले हुए हैं वहीं लोगों को राहत देने के नाम पर कतिपय अधिकारी उस राशि की बंदरबाट कर खुद की जेब भरने पर आमदा है.

जनपद पंचायत में साढ़े 5 सौ लीटर सेनिटाईजर प्रति लीटर 423 के हिसाब से ग्राम पंचायतों में भेजा गया. अब जीएसटी मिलाकर 5 सौ के हिसाब से पेमेंट लिया जा रहा है.

सवाल उठने पर जिला मुख्यालय से भेजने की बात कही जा रही है. उक्त सेनिटाईजर भाटिया वाईन मर्चेंट्स मुंगेली से खरीदा गया. वितरण अकरजन पंचायत से हुआ.

मामले में सवाल यह उठता है कि जब सेनिटाईजर उच्च कार्यालय से वितरण के लिए जनपद पंचायत पहुँचा तो उसे कार्यालय भवन में रखना छोडक़र 3 किमी दूर अकरजन पंचायत भवन में क्यों रखा गया और किस कारण से पंचायत सचिवों को वहां से वितरित किया गया?

स्थानीय स्तर पर इसकी जानकारी साझा करने की जगह इस पर पर्दा क्यों डाले रखा गया? खरीदी के लिए जब रायपुर दुर्ग में बड़े स्तर पर सेनिटाईजर निर्माण करने वाली कंपनियां हैं तो किस आधार पर मुंगेली की कंपनी को सप्लाई का आर्डर दिया गया और क्या खरीदी को लेकर भंडार क्रय नियमों का पालन किया गया?

सेनिटाईजर निर्माण करने वाली अन्य कंपनियों से प्रति लीटर दर को लेकर कोटेशन मंगाया क्या? सबसे बड़ी बात यह है कि 14वें वित्त की राशि जरूरत हिसाब से खर्च करने का अधिकार प्रस्ताव के आधार पर संबंधित ग्राम पंचायत को है तो फिर उनके अधिकारों का अतिक्रमण करते हुए सेनिटाईजर खरीदी के लिए स्थानीय स्तर पर व्यवस्था बनाने क्यों नहीं कहा गया?

सारे सवालों को लेकर देखा जाए तो यह स्पष्ट होता है कि कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर शासन प्रशासन द्वारा जारी राहत औऱ बचाव कार्य में भी कमीशन के लालच में जनपद के कतिपय अधिकारी द्वारा छोटे कर्मचारियों को सामने रखकर मानवता को शर्मशार करने वाला कृत्य किया गया है जिसकी जांच जरूरी है.

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