शक्कर कारखाने में महीनों से किसानों के फंसे 66 करोड़

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कवर्धा.

जिले के कवर्धा व पंडरिया स्थित दो शक्कर कारखानों में किसानों के तकरीबन 65.76 करोड़ रुपए फंस गए हैं. महीनों से भुगतान नहीं हो पाने के चलते कोरोना महामारी के समय किसानों को चौतरफा परेशानी हो रही है.

कबीरधाम स्थित शक्कर कारखाना का नाम छत्तीसगढ़ का खजुराहो माने जाने वाले प्रसिद्ध तीर्थ पर्यटन केंद्र भोरमदेव के नाम पर रखा गया है.

जबकि पंडरिया स्थित सहकारी शक्कर कारखाना का नाम देश के प्रथम गृहमंत्री लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की याद में रखा गया है.

भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना व सरदार वल्लभभाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाना से कुल 20 हजार 182 पंजीकृत किसान जुडे़ हुए हैं. जबकि 19 हजार 537 शेयरधारी किसान दोनों के अधीन आते हैं.

किस कारखाने की कितनी राशि फंसी

पंडरिया शक्कर कारखाना के 4 हजार 966 किसानों के लगभग 19 करोड़ 45 लाख रुपए फंसे बताए जाते हैं.

इसी तरह राम्हेपुर स्थित भोरमदेव शक्कर कारखाना में 9 हजार 280 किसानों के लगभग 46.31 करोड़ की राशि का भुगतान लंबित है.

जिले मेंं दो शक्कर कारखाना होने से किसानों को गन्ना बिक्री करने में सुविधा तो मिल रही है लेकिन पांच माह की परेशानी के बाद भी समय पर भुगतान नहीं होने से आर्थिक समस्याओं से जुझना पड़ रहा है.

दोनों शक्कर कारखाना के 14 हजार से अधिक किसानों का 65.76 करोड़ रुपए बकाया है. इन कारखानों में किसानों ने कुल 4 लाख 57 हजार 214.52 मीट्रिक टन गन्ना बेचा था.समर्थन मूल्य 261.25 प्रति क्विंटल की दर पर विक्रय किया गया था.

इसकी कुल कीमत 124.44 करोड़ रुपए होती है. इसमेंं अब तक मात्र 58.68 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा सका है, जबकि 14 हजार 246 किसानों का 65.76 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं हो पाया है.

एक ओर कोरोना जैसी महामारी के समय आर्थिक गतिविधियों के प्रभावित होने के चलते किसान ऐसे ही परेशान हैं ऊपर से भुगतान लंबित हो जाने से उनकी कमर टूटने लगी है.

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