भूपेश सरकार ने कोरोना कीट 337 में तो मोदी सरकार ने 795 में क्यों खरीदा : आफताब

राजनांदगांव।  कोरोना के खिलाफ युद्ध के दौरान एक बड़ा घोटाला होने जा रहा है। ज्ञात हो कि कारगिल युद्ध के दौरान भी इसी भाजपानीत केंद्र सरकार ने ताबूत घोटाला तथा रक्षा घोटाला किया था। उक्त आरोप लगाते कांग्रेस नेता आफताब आलम ने कहा कि इंडियन कौंसिल मेडिकल (आईसीएमआर) रिसर्च ने हाल ही में चीन मंगाए रेपिड टेस्ट का उपयोग न करने की एडवाइजरी जारी की है। इन किटस में कोरोना जांच के नतीजे गड़बड़ पाए गए है। अब आईसीएमआर खुद मान रहा है कि बिना टेंडर के चीनी अफसरों की बात मानकर किट्स सीधे आर्डर कर दिए गए। चीन से आयतित हुई नकली किट केंद्र सरकार ने 795 में खरीदी, कर्नाटक की बीजेपी सरकार ने भी उक्त राशि में ही खरीदी की, लेकिन आंध्र सरकार ने इसी कंपनी ने 640 रूपए में खरीदी। निश्चित तौर पर अब यह सवाल खड़ा हो रहा है कि चीनी कंपनी की किट के अलग-अलग दाम क्यों है। केंद्र सरकार की आईसीएमआर ने टेंडर क्यों जारी नहीं किया तथा टेस्ट किट की गुणवत्ता की जांच कौन कर रहा है, जबकि दक्षिण कोरिया की हरियाणा मानेसर स्थित फर्म एसडी बायो सेंसर रैपिड टेस्टिंग कीट लगभग 380 रूपए में बेच रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इसी कंपनी से 337 रूपए की दर पर खरीदी की और जिसके टेस्ट नतीजे में काफी अच्छे है।

श्री आलम ने केंद्र सरकार द्वारा उक्त खरीदी की जांच की मांग करते कहा है कि खरीदी के लिए पारदर्शिता क्यों नही बरती गई। खरीदी से पूर्व इसकी प्रामणिकता का मूल्यांकन क्यों नहीं किया गया। श्री आलम ने गंभीर सवाल उठाते कहा कि प्रधानमंत्री  केयर फंड समिति में नेता प्रतिपक्ष को क्यों शामिल नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि पीएम केयर फंड का  कैग द्वारा ऑडिट नहीं कराने का प्रावधान क्यों रखा गया है। प्रधानमंत्री केयर फंड को आरटीआई के दायरे से क्यों बाहर रखा गया है। श्री आलम ने कहा कि क्या देश की जनता को यह जानने का हक नहीं है कि पीएम केयर फंड में कितनी धनराशि जमा हुई है और उसका कहां-कहां उपयोग किया जा रहा है।

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