बजरंग बलि के हर नाम का अर्थ उनके जीवन का सार बताता है

रायपुर।

बजरंगबली, पवन पुत्र, अंजनी पुत्र जैसे 108 नाम हनुमान जी के हैं। हर नाम का अर्थ उनके जीवन का सार बताता है। माना जाता है कि हनुमान जी अभी भी धरती पर हैं। हनुमान जी के बारे में रामायण, श्रीरामचरितमानस, महाभारत समेत अन्य धर्मग्रंथों में जानकारी मिलती है। हनुमान जी की माता अंजना को भगवान शिव ने उनके पुत्र के रूप में जन्म लेने का वरदान दिया था।

बचपन में हनुमान जी को मारुति नाम से बुलाते थे। उन्होंने सूर्य को फल समझकर खा लिया था। इस पर भगवान इंद्र ने उन पर बज्र से प्रहार किया, जिससे उनका जबड़ा टूट गया। इस घटना के बाद मारुति को हनुमान कहा जाने लगा। हनुमान जी ने सूर्य देवता को अपना गुरु बनाया। सूर्य देवता ने उन्हें नौ विद्याओं में से पांच सिखा दी, लेकिन चार विद्याओं की बारी आई तब सूर्यदेव ने हनुमान जी से शादी करने को कहा। क्योंकि इन विद्याओं का ज्ञान विवाहित को ही दिया जा सकता था। सूर्यदेव ने अपनी पुत्री सुवर्चला से शादी का प्रस्ताव दिया। हनुमान जी और सुवर्चला की शादी हो गई। सुवर्चला परम तपस्वी थीं। शादी के बाद वह तपस्या में लीन हो गईं। उधर, हनुमान जी अपनी चार विद्याओं को प्राप्त करने में लग गए। ऐसे में विवाहित होने के बाद भी हनुमान जी का ब्रह्मचर्य व्रत नहीं टूटा।

भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक के बाद हनुमान जी हिमालय चले गए और वहां उन्होंने अपने नाख़ून से रामायण को लिखा। जब महर्षि वाल्मीकि अपनी रामायण हनुमान जी को दिखाने गए तो वहां वर्णित रामायण को देख उदास हो गए । उनका मानना था कि हनुमान जी की रामायण श्रेष्ठ है। यह देख हनुमान जी ने अपनी रामायण को मिटा दिया। एक बार गुरु विश्वामित्र हनुमानजी से नाराज हो गए और उन्होंने प्रभु श्रीराम को हनुमान जी को मत्युदंड देने को कहा। भगवान श्रीराम अपने गुरु को मना नहीं कर सकते थे, लेकिन हनुमान जी राम नाम जपते रहे और उन पर किया गया हर प्रहार विफल हो गया। इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *