झारखंड में निजी हाथों में स्वास्थ्य सेवा सौंपने की तैयारी

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विधानसभा चुनाव से गुजर रहे झारखंड में स्वास्थ्य सेवा को लेकर एक गंभीर खबर सामने आ रही है. राज्य के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जाने लगी है.

फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है लेकिन सरकार का सारा जोर स्वास्थ्य सेवाओं को निजी हाथों में सौंपने का है. राज्य के मुख्य सचिव स्वास्थ्य केंद्रों को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) में सौंपने की दिशा में बढ़ रहे हैं.

3876 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र

झारखंड राज्य में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या 3876 बताई जाती है. इन्हें ही प्राइवेट हाथों में सौंपने की तैयारी हो रही है. स्वास्थ्य शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव इसके निर्देश दे चुके हैं.

इन स्वास्थ्य केंद्रों में फिलहाल रोटेशन सिस्टम से डॉक्टर जाते हैं. हालांकि मरीजों को इससे बेहद परेशानी होती है. ज्यादातर स्वास्थ्य केंद्र ऐसे हैं जहां बिना चिकित्सक के ही उपचार किया जाता है.

अब पीपीपी मोड में जब इन स्वास्थ्य केंद्रों को संचालित किया जाएगा तो इसके लिए एक विशेषज्ञ समूह के भी गठन करने की तैयारी हो रही है.

बताया जाता है कि अधिकांश प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों की कमी बनी हुई है. फिलहाल इसे दूर करने ऐसे स्वास्थ्य केंद्रों से चिकित्सक वापस बुलवाए जा रहे हैं जहां कम संख्या में मरीज जाते हैं.

झारखंड के तकरीबन 4000 स्वास्थ्य केंद्रों में से लगभग आधे में मरीज पहुंच ही नहीं पाते क्योंकि वहां जाने से भी कोई फायदा उन्हें नजर नहीं आता है.

यदि मरीज इन स्वास्थ्य केंद्रों से उपचार कराने जाता है तो चिकित्सक द्वारा लिखी गई जांच की पर्ची पर उसे निजी चिकित्सालयों से जांच करानी पड़ती है.

अब यदि ऐसे में मरीज पुराने चिकित्सक से ही उसके द्वारा लिखी गई पर्ची पर उपचार की सलाह लेना चाहे तो उसे तकरीबन सप्ताहभर का इंतजार करना पड़ता है. ऐसी स्थिति में मरीज सरकारी चिकित्सालय की जगह सीधे निजी चिकित्सालयों में जाते हैं.

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