11 जेलों में अधीक्षक का पद प्रभारी के भरोसे

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झारखंड का जेल विभाग इन दिनों कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है. 11 जेलों में अधीक्षक (सुप्रिटेंडेंट) का पद प्रभारी के भरोसे चल रहा है. 30 पदों के विरूद्ध मात्र 3 जेल में ही जेलर पदस्थ हैं.

बताया जाता है कि कक्षपाल से लेकर जेलर तक के पद किसी तरह चलाए जा रहे हैं. झारखंड नक्सल प्रभावित राज्य है.

जेलों में कई नक्सली अथवा उनके मददगार बंद हैं इसके बावजूद जेल की सुरक्षा पर सरकार का जरा भी ध्यान नहीं है.

अनुबंध के आधार पर रखा गया जेलर

झारखंड के 28 जेलों में 11 जेल सुप्रिटेंडेंट के पद प्रभारी भरोसे चलाए जाने की समस्या झेल रहे हैं. 17 जेल में ही अधीक्षक पदस्थ हैं.

इसी तरह जेलर के लिए स्वीकृत 30 पद के लिए मात्र 3 जेल में ही जेलर पदस्थ हैं. यहां भी प्रभारी भरोसे काम चलाया जा रहा है. एक जेल तो ऐसा है जहां अनुबंध के आधार पर जेलर पदस्थ किया गया है.

असिस्टेंट जेलर के 66 पद झारखंड में स्वीकृत बताए जाते हैं. इनमें 51 पद इन दिनों खाली हैं. 15 पदों पर सहायक जेलर कार्य कर रहे हैं. इसी तरह की स्थिति पुरूष कक्षपाल व महिला कक्षपालों की है.

पुरूष कक्षपाल के वैसे तो राज्य में 1655 पद स्वीकृत हैं लेकिन 315 ही स्थाई तौर पर कार्यरत हैं. यहां पर भी अनुबंध के आधार पर पूर्व सैनिकों से काम लिया जा रहा है. 693 पूर्व सैनिक पुरूष कक्षपाल के पद पर काम कर रहे हैं.

इसके बावजूद राज्य में 40 फीसदी पुरूष कक्षपाल के पद रिक्त हैं. महिला कक्षपालों की स्थिति थोड़ी बेहतर बताई गई है. राज्य में 104 स्वीकृत पदों के विरूद्ध 81 महिला कक्षपाल कार्यरत हैं. 23 पद रिक्त पड़े हुए हैं.

उच्च कक्षपाल में पुरूष के 244 पद झारखंड में स्वीकृत हैं. आश्चर्यजनक बात यह है कि इनमें से 233 पद रिक्त पड़े हुए हैं. महज 11 पदों पर उच्च कक्षपाल कार्यरत हैं.

झारखंड में जब जेलों में उच्च पदों की ऐसी स्थिति है तो निम्र पदों की कल्पना की जा सकती है. सफाईकर्मी के 172 पद और वाहनचालक के 85 पद स्वीकृत होने के बावजूद इनमें से एक पद पर भी कर्मचारी कार्यरत नहीं है.

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