डांगी बने रहेंगे,आईजी की होगी नियुक्ति?

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रायपुर.

लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगने के पहले महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां अपने अंतिम चरण पर पहुंच गई है. रायपुर के प्रभारी आईजी को प्रमोट कर वहीं आईजी बना दिया गया है जबकि दुर्ग के प्रभारी आईजी रतनलाल डांगी से जुड़ी समस्या का हल सरकार ढूंढऩे में लगी है. अंतत: डांगी को दुर्ग में ही पदस्थ रख इस रेंज में आईजी की नियुक्ति किए जाने की संभावना जताई जा रही है.

2019 शुरू होते ही सरकार ने एक आदेश जारी किया था. इसी आदेश में दीपांशु काबरा (1997) व जीपी सिंह (1994) को क्रमश: रायपुर व दुर्ग रेंज से हटा दिया गया था.

2 जनवरी को यह आदेश हुआ था कि काबरा के स्थान पर डॉ. आनंद छाबड़ा (2001) व सिंह के स्थान पर रतनलाल डांगी (2003) क्रमश: रायपुर व दुर्ग रेंज के प्रभारी पुलिस महानिरीक्षक होंगे.

तब से दोनों ही इन पदों पर कार्य करते आ रहे हैं. 28 फरवरी को एक पदोन्नति आदेश जारी होता है. इसी आदेश में डॉ. आनंद छाबड़ा डीआईजी से आईजी पद पर पदोन्नत हो जाते हैं.

उनके पास रायपुर रेंज का दायित्व पहले की ही तरह रहता है लेकिन दुर्ग रेंज की समस्या का हल अब तक नहीं ढूंढ़ा जा सका है.

आचार संहिता के पहले होगी नियुक्ति

दरअसल आचार संहिता लगने को है. इसी के साथ दुर्ग रेंज पर निगाह टिक गई है. कई ऐसे हैं जो कि सरकार को साधने का प्रयास कर रहे हैं.

इसी कड़ी में दीपांशु काबरा का नाम सुनाई दे रहा है. कहा जा रहा है कि वह दुर्ग के आईजी बना दिए जाएंगे. लेकिन इसमें बहुत सी दिक्कत है.

चूंकि उन्हें पहले भी दुर्ग में काम करने का अवसर रमन सरकार में मिला है इसकारण कांग्रेस सरकार वापस उन्हें दुर्ग लाए इस पर शक है.

दुर्ग बेहद महत्वपूर्ण रेंज है. पूर्व मुख्यमंत्री का निर्वाचन जिला राजनांदगांव इसी रेंज में आता है. वर्तमान मुख्यमंत्री इसी रेंज के हैं.

इसके चलते काबरा की पदस्थापना होने पर शक है. अब बचे केसी अग्रवाल. चूंकि केसी अग्रवाल को गलत तरीके से रमन सरकार के समय सेवानिवृत्त कर दिया गया था इसकारण उनकी पदस्थापना हो सकती है.

3 अगस्त 2017 को केसी अग्रवाल (2001) को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया गया था. अग्रवाल ने कानूनी लड़ाई लड़ी और फैसला उनके पक्ष में आया.

इसी साल 9 जनवरी को उन्हें वापस सेवा में लेने का आदेश जारी करते हुए 5 अगस्त 2017 से उनकी सेवा बहाल कर दी गई थी.

अभी वह 28 फरवरी को छाबड़ा के साथ डीआईजी से आईजी पद पर पदोन्नत हो गए हैं. इसके चलते उन्हें दुर्ग का प्रभार देने में कोई दिक्कत नहीं आएगी.

अभी प्रभारी आईजी दुर्ग के रूप में रतनलाल डांगी काम कर रहे हैं. उन्हें दंतेवाड़ा रेंज से निकालकर यहां लाया गया है. वह नक्सली क्षेत्र में काम करने के साथ ही मैदानी इलाके में बगैर किसी विवाद के काम कर रहे हैं.

लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के पहले दुर्ग को आईजी देना है. यदि अभी आईजी की नियुक्ति नहीं हो पाई तो मामला चुनाव आयोग तक पहुंचेगा. उस वक्त तीन अफसरों के नाम का पैनल बनाकर भेजना पड़ेगा. नियुक्ति उसके मार्गदर्शन में ही होगी.

इस समस्या से बचने के लिए डांगी को यथावत रख यहां केसी अग्रवाल लाए जा सकते हैं. चूंकि काबरा पहले भी दुर्ग रेंज संभाल चुके हैं इसकारण उनकी नियुक्ति पर संशय के बादल हैं.

आईपीएस अग्रवाल को नियुक्त कर सरकार डांगी को बनाए रख सकती है. लोकसभा चुनाव निपटने के बाद सरकार नए सिरे से जब नियुक्तियां करेगी तब दुर्ग के मसले का हल ढूंढ़ा जा सकता है.

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