निलंबित कर दिए गए महकमे और सरकार पर आरोप लगाने वाले आईपीएस

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लखनऊ।
2010 बैच के आईपीएस हिमांशु कुमार अंतत: निलंबित कर दिए गए। दरअसल उन्हें उस बात की सजा मिली है जो उन्होंने यूपी की सत्ता परिवर्तन के बाद सोशल मीडिया में सरकार के खिलाफ टिप्पणी कर की थी। उन्हें डीजीपी जावीद अहमद ने निलंबित कर दिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने डीजीपी समेत पुलिस विभाग के कई अफसरों पर गंभीर लगाए थे।
इधर, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा, यूपी में जाति विशेष के अफसरों का ट्रांसफर और सस्पेंशन हो रहा है, ये सभी जानते हैं। सस्पेंड होने के बाद हिमांशु ने ट्वीट किया, “सत्यमेव जयते।”
बता दें, 2010 बैच के ढ्ढक्कस् हिमांशु कुमार ने सोशल मीडिया के जरिए डीजीपी ऑफिस पर जाति के आधार पर भेदभाव करने के आरोप लगाए थे। हिमांशु पर दहेज उत्पीडऩ का मामला भी दर्ज है। आईपीएस ने ट्वीट कर बताया था कि उसकी पत्नी 10 करोड़ रुपए के लिए ब्लैकमेल कर रही है। मामला मीडिया में आने के बाद हिमांशु ने कुछ ट्वीट्स डिलीट कर दिए और सफाई भी दी थी कि, कुछ लोगों ने मेरे पर्सनल लीगल केस को सोशल मीडिया में लाने की कोशिश की है।
दहेज प्रताडऩा के हैं आरोपी
हिमांशु कुमार ने जुलाई 2014 में मोतिहारी, बिहार निवासी प्रिया सिंह से शादी की थी।बता दें, हिमांशु और उनकी पत्नी प्रिया काफी समय से अलग-अलग रह रहे हैं।
सेकंड मैरिज एनिवर्सरी से पहले ही हिमांशु ने प्रिया से अलग होने का फैसला कर लिया। प्रिया ने पटना जिला अदालत में दहेज उत्पीडऩ का केस भी फाइल किया हुआ है। हिमांशु ने आरोप लगाया कि जब एक आईपीएस अधिकारी को अपने केस में इतना झेलना पड़ रहा है तो आम लोगों का क्या हाल होता होगा।
5 मार्च 2016 को उन्होंने दिल्ली के द्वारका कोर्ट में डिवोर्स पिटीशन फाइल की थी। हिमांशु ने ट्वीट किया, कुछ लोग मेरे पर्सनल कोर्ट केस को सोशल मीडिया पर घसीट रहे हैं। मैं यहीं उनसे हिसाब चुकता करूंगा। मैंने 2016 में डिवोर्स पिटीशन फाइल की थी। उसे वापस लेने के लिए मुझ पर कई तरह के प्रेशर बनाए गए।
7 मई को प्रिया ने मेरे पूरे परिवार के खिलाफ दहेज प्रताडऩा का केस दायर किया। उसने मेरे 80 साल के दादाजी को भी नहीं छोड़ा। कोर्ट ने शुरुआत में ही मेरे दादाजी को आरोपों से बरी कर दिया। यह उस लड़की की दुष्टता दिखाता है। हिमांशु ने आगे लिखा, यह एक झूठे दहेज केस ये 498 केस की ताकत है कि एक पुलिसवाले को भी ब्लैकमेल किया जा सकता है। वो लड़की मुझे 10 करोड़ देने के लिए ब्लैकमेल कर रही है।
हिमांशु ने दर्ज कराई है रपट
2010 बैच के ढ्ढक्कस् हिमांशु कुमार ने बिसरख, नोएडा में पत्नी के खिलाफ चल रहे केस से रिलेटेड स्नढ्ढक्र दर्ज करवाई थी।
हिमांशु ने बुधवार को नोएडा डीजीपी पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए ट्वीट किया, डीजीपी ने मेरी स्नढ्ढक्र की सही ढंग से इन्वेस्टिगेशन क्यों नहीं होने दी? उन्होंने ट्वीट किया था, क्यों डीजीपी ऑफिस अफसरों को लोगों की जात के आधार पर सजा देने के लिए फोर्स कर रहा है? हिमांशु ने आरोप लगाया था कि अब सीनियर अफसर ‘यादवÓ सरनेम वाले पुलिसकर्मियों को सस्पेंड करने या उन्हें रिजर्व लाइन्स में ट्रांसफर करने में जुट गए हैं।हिमांशु ने अपनी कुछ ट्वीट्स में ष्टरू आदित्यनाथ योगी को भी टैग किया है।
6 जिले संभाल चुके हैं
हिमांशु कुमार सिंह 2010 बैच के आईपीएस हैं। हिमांशु को अब तक छह जिलों महराजगंज, श्रावस्ती, हापुड़, कासगंज, मैनपुरी और फिरोजाबाद में एसपी बनाकर भेजा जा चुका है। यूपी इलेक्शन से पहले वे फिरोजाबाद के एसपी थे। इलेक्शन रिजल्ट के बाद उन्हें लखनऊ डीजीपी हेडक्वार्टर्स के साथ अटैच कर दिया गया।
उत्तर प्रदेश में नए सीएम के आते ही प्रशासन में किये फेरबदल को लेकर एक आईपीएस ऑफिसर ने पुलिस महकमे के बड़े अधिकारियों पर जाति के आधार पर तबादले का गंभीर आरोप लगाया। हालांकि बाद में अधिकारी ने अपना ट्वीट हटाते हुए कहा कि उनके ट्वीट को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
आईपीएस अधिकारी हिमांशु कुमार ने कहा कि यूपी में पुलिस महकमे में हो रहे तबादलों में एक जाति विशेष लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। अधिकारी ने ट्वीट कर कहा, ‘वरिष्ठ अधिकारियों में ‘यादव’ सरनेम वाले पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड करने या रिजर्व लाइन भेजने के लिए होड़ मची है।’
वहीं राज्यसभा में चुनावी सुधार मुद्दे पर चल रही बहस के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने कहा कि यूपी के बारे में कमीशन की धारणा ये है कि यहां एक खास समुदाय के अधिकारी नहीं रहने चाहिए। उन्होंने कहा, ‘यूपी में चुनाव के पहले 10 डीएम यादव थे, उनमें से 8 का पहले ही दिन ट्रांसफर कर दिया।Ó यादव ने कहा कि इससे अधिकारियों का मनोबल गिरता है। उनके साथ जातिगत भेदभाव नहीं होना चाहिए।
क्या कहते हैं डीजीपी
डीजीपी जावीद अहमद का कहना है कि कार्रवाई सिर्फ नोएडा में नहीं, बल्कि कई और जिलों में की गई है। इसके लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देशित किया गया था।किसी जाति विशेष के खिलाफ कार्रवाई जैसे निर्देश कहीं किसी को नहीं दिया गया है। यहां से जो भी निर्देश दिए गए, वह निष्पक्ष कार्रवाई के दिए गए।
डीजीपी जावीद अहमद और प्रमुख सचिव गृह देबाशीष पंडा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जिलों में तैनात पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि थानों में दलालों के प्रवेश पर रोक लगाई जाए और थानेदारों के कारखास पर कड़ी कार्रवाई की जाए।इसके बाद नोएडा में 44 और मेरठ में तीन पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया था। मेरठ में 62 अन्य पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर भी किया गया।
इस पर हिमांशु का कहना है कि जिन पुलिसकर्मियों को हटाया गया है, वे सभी जाति विशेष के लोग हैं।अगर ये पहले से ऐसे कामों में लिप्त थे, जिससे पुलिस की बदनामी हो रही थी तो पहले यह कार्रवाई क्यों नहीं की गई? कहा, इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

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