नक्सली गतिविधियों में भी महिलाएं आगे!

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जगदलपुर।

एक ओर नक्सलियों के तांडव ने जर्रा-जर्रा हिला दिया है। आश्चर्यजनक है कि नक्सलियों में एक बड़ी हिस्से की भागीदारी महिलाओं के पास है। हाल में बुर्कापाल में जवानों पर हुए हमले में भी महिला नक्सलियों की तादात पुरुषों से ज्यादा थी। न केवल इनकी तादात बल्कि नक्सलियों की रणनीतियों में भी महिलाएं अपना वर्चस्व बढ़ा रहीं हैं।

25 मई को दरभा जीरम घाट पर हुए कांग्रेसियों की परिवर्तन यात्रा हमले को भी नक्सली महिला लीडरों ने अंजाम दिया था। देश में एक ओर महिलाओं को 60 प्रतिशत आरक्षण देने की बहस चल रही है, तो वहीं दूसरी ओर नक्सल प्रभावित जिलों में नक्सल संगठन भी महिला नक्सलियों को आरक्षण देते हुए उन्हें कैडर के हिसाब से पद दे रहे हैं।

लाखों की ईनामी महिला नक्सली
बस्तर में ऐसी कई महिला खूंखार लीडर हंै, जो बेहतर ढंग से नक्सली मूवमेंट को आगे बढ़ा रही हैं। हाल ही में पुलिस ने महिला नक्सलियों कुमारी वनोजा पर 8, कुमारी सोढ़ी लिंगे पर 5 एवं माड़वर मंगली की गिरफ्तारी पर 3 लाख रूपए का ईनाम घोषित किया है।

बस्तर संभाग के सभी सातों जिले अतिसंवेदनशील जिले घोषित हैं और इन सातों जिले में बड़ी संख्या में महिला नक्सलियों की भरती की गयी है, जो हथियार चालने में माहिर हैं। इन्हीं में से पूर्णत: दक्ष एवं मारकाट में माहिर महिला नक्सलियों को बड़े ऑपरेशन की जिम्मेदारी भी दी जाती है। संभाग में कई महिला नक्सली पुलिस के हत्थे भी चढ़ी हैं, जिनके माध्यम से हुए खुलासे में यह पता चला है कि, बड़े नक्सली लीडर ज्यादातर महिला नक्सलियों को ही आपरेशन की कमान सौंपते हंै, क्योंकि वे बड़ी आसानी से फोर्स के कैम्पों तक पहुंच कर रैकी कर सकती हैं और बेखौफ होकर बाजार व शहरों में रहकर नेटवर्क तैयार कर सकती हैं।

मूवमेंट बढ़ाने और हिंसा फैलाने का जिम्मा
सूत्रों की मानें तो बस्तर संभाग के दरभा, भेज्जी, फरसेगढ़, कुटरू, छोटेडोंगर, झारा घाटी, आवापल्ली, आमाबेड़ा, ओरछा सहित आधा दर्जन इलाकों में महिलाओं को एरिया कमांडर के पद पर तैनात कर नक्सली मूवमेंट को बढ़ाने और भारी हिंसा फैलाने का काम सौंपा गया है।

पुलिस भी मानती है कि इन सात सालों में बड़ी संख्या में महिलाएं नक्सली दलम मेें शामिल होकर संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही हैं और वह इसी नजरिए से संदिग्ध महिलाओं पर पैनी निगाह गड़ाये हुए है।

हर घर से मांग रहे युवती
बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित क्षेत्र के गांवों से लगातार आदिवासी महिलाएं लापता हो रही हैं, वहीं नक्सली हर गांव के प्रत्येक घर से एक युवती की मांग कर रहे हैं और जनयुद्ध का स्कूल चलाकर आदिवासी छात्राओं को संगठित कर, युद्ध कौशल की विभिन्न विधाओं सहित माओवादी विचारधारा का भी पाठ पढ़ा रहे हैं।

पुलिस द्वारा नक्सल विरोधी अभियान के तहत नक्सली कैम्पों में जो किताबें बरामद हुयी हैं, उनके अध्ययन से ज्ञात हुआ कि दक्षिण बस्तर के घने जंगलों में नक्सली युवतियों को क्रांति का पाठ पढ़ा रहे हैं। अंदरूनी इलाकों में नक्सलियों द्वारा चलाए जा रहे प्रशिक्षण केन्द्रों में हथियार संचालन के साथ ही विद्रोह का भी प्राथमिक ज्ञान दिया जा रहा है। उक्त किताब में दंडकारण्य जनता विद्रोह का एक पाठ भी जोड़ा गया है।

बस्तर की जेलों में 50 महिला बंदी

बस्तर की जेलों में वर्तमान में लगभग 50 महिला नक्सली कैद हैं, जिन्हें सातों जिलों से पुलिस ने पकड़ा है। इनमें चार हार्डकोर नक्सली निर्मल्लका, सोनी सोढ़ी, पदमा एवं चंद्रिका हंै जो नक्सलियों के बड़े मूवमेेंट को आपरेट करती थीं। फिलहाल इन महिला नक्सलियों के खिलाफ कोर्ट मेें मामले चल रहे हंै। नक्सलियों ने बस्तर में वर्ष 2006 से महिला नक्सलियों को दलम में शामिल करना प्रारम्भ किया गया था। उसी साल नक्सलियों ने कई बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया था।

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