निर्णय लेने की क्षमता खो चुकी भाजपा, विक्रांत के नाम पर पीछे हट रही

रायपुर।

खैरागढ़ विधानसभा उप चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 24 मार्च तय है. जहां कांग्रेस ने यशोदा वर्मा को आगे कर तस्वीर साफ कर दी है वहीं लुकेश्वरी जंघेल का नाम लगभग फाईनल होने के बाद भी भाजपा मंत्रणा ही कर रही है.

कांग्रेस बढ़त बना चुकी है. दूसरी ओर भाजपा नेतृत्व में निर्णय क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं. इस विधानसभा में ही भाजपा दो निकायों में सत्ता गंवा चुकी है. जाहिर है, भाजपा संगठन का नेतृत्व भी इस क्षेत्र को लेकर उदासिन रवैया अपनाये हुए है.

भाजपा ढेर तो हो ही चुकी है पर अब उसने आत्मसमर्पण कर दिया है. पूर्व मुख्यमंत्री के निर्वाचन जिले में भाजपा की दुर्गति का यह सबसे बड़ा उदाहरण है.

जिस नाम पर लोगों और भाजपा के लिए काम करने वालों का बहुमत है, उस विक्रांत सिंह को दरकिनार किए जाने की कुवत भाजपा भी नहीं जुटा पा रही है.

हालांकि, विक्रांत के नाम पर कई कारणों से पार्टी पीछे हट रही है. मामले कई हैं. विक्रांत को राजपरिवार का साथ मिल सकता है. भाग्य कहें या राजनीतिक दांवपेंच विक्रांत अब तक अजेय रहे हैं. निकाय चुनाव के दौरान उन्होंने अपनी अलग ही छाप छोड़ी है.

इससे परे भाजपा संगठन का ढुलमुल रवैया कोसने लायक है.

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