मानवाधिकार के बाद महिला आयोग के खिलाफ भी मिला स्थगन

एडीजी के खिलाफ आरोप लगाने वालों के मंसूबे धराशाही

नेशन अलर्ट / 97706 56789

बिलासपुर.

राज्य के एक अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ( एडीजी ) के खिलाफ कथित झूठी शिकायत करने वालों के मंसूबे धराशाही होने लगे हैं. दरअसल, पहले राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ( एनएचआरसी ) और फिर राज्य महिला आयोग की नोटिस पर हाईकोर्ट से स्थगन प्राप्त कर एडीजी ने अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है.

मामला थोडा़ ज्यादा पुराना है. उस समय आईपीएस पवन देव बिलासपुर रेंज में बतौर पुलिस महानिरीक्षक ( आईजी ) के पद पर पदस्थ थे. आईजी रहते हुए देव ने निरीक्षक आशीष वासनिक को बर्खास्त कर दिया था.

वासनिक के बर्खास्त होते ही उनकी नजदीकी महिला आरक्षक जोकि मुंगेली में पदस्थ बताई जाती है ने अनर्गल आरोप लगा दिए. अनर्गल आरोप पर तकरीबन चार साल से जांच चल रही है.

मामला कोर्ट में लंबित बताया जाता है फिर भी पहले एनएचआरसी और फिर स्टेट वुमन कमीशन का सहारा लेने का प्रयास किया गया जोकि अब उन्हें ही महंगा पड़ता नजर आ रहा है.

अंतरिम राहत के लिए बहुत मजबूत केस माना

मामले में महिला आयोग की ओर से एडीजी देव को नोटिस जारी की गई थी. इसे एडीजी ने बिलासपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. अंतत: उनके वकील मनोज परांजपे के तर्क हाईकोर्ट में स्वीकार किए गए.

ज्ञात हो कि महिला आयोग के जो विनियम है उसके अनुसार वह एक साल से ज्यादा पुराने मामले या फिर न्यायालय में विचाराधीन मामले में संज्ञान नहीं लेगा.

एडीजी पवन देव का मामला चार साल से पुराना है इसके बावजूद महिला आयोग ने उन्हें नोटिस जारी कर एक तरह से अपने ही नियम का उल्लंघन किया.

सरकार ने कार्रवाई भी कर दी है यह मानते हुए
आयोग द्वारा जारी की गई कारण नोटिस से अदभूत होने वाली समस्त कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है. हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत के लिए बहुत मजबूत केस मानते हुए यह रोक लगाई है.

• एनएचआरसी की कार्रवाई पर पर भी लगी है रोक

उल्लेखनीय है कि इसी से जुडी़ एक और शिकायत पर एडीजी देव को पहले भी एनएचआरसी के खिलाफ स्टे मिल चुका है. एनएचआरसी में उसी महिला आरक्षक ने शिकायत की थी जिसने महिला आयोग में उक्त शिकायत की.

हाईकोर्ट ने तब एडीजी देव की याचिका की सुनवाई के दौरान माना था कि अपने कार्य क्षेत्र से बाहर जाकर एनएचआरसी ने कार्य किया है जोकि गलत है. इस आधार पर उसने स्थगन भी दिया.

बहरहाल, अब हाईकोर्ट से स्टे लाकर एडीजी ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है. पहले एनएचआरसी और फिर वुमन कमीशन के मामले में स्टे ने देव के खिलाफ कथित झूठी शिकायत करने वालों को परेशानी में ला दिया है.

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